Tuesday, 10 April 2012

अपनी हिफाजत

आप सभी को अवगत कराना चाहता हूं कि इस व्यंग्य को मैंने तब लिखा था जब जनरल वीके सिंह सेना अध्यक्ष थे और रियारमेंट से पहले बोल रहे थे कि हमारी सेना के पास उच्च कोटि के हथियार नहीं हैं. चौकीदार-वीके सिंह चौधरी - अमेरिका प्रधान मंनमोहन सिंह (तत्कालीन प्रधानमंत्री)



गांव के लोगों में खुसर-पुसर मची थी। स•ाी गफलत में थे कि आखिर गांव में चल क्या रहा है। पूरा गांव झम्मनलाल को ढूंढ रहा था। इतने में झम्मनलाल कंधे पर कई लाठियां लादकर देश की अर्थव्यवस्था की तरह डगमगाता चला आ रहा था। लोगों ने झम्मन का अफवाहों की तरह स्वागत किया। क्योंकि हमारे गांव के लोग अफवाहों को हाथोंहाथ लेते हैं। झम्मनलाल ने इससे पहले क•ाी इतना सम्मान नहीं पाया था। घसीटे ने झम्मन के कंधों से लाठियां उतारीं और पूछा: क्या बात है झम्मन, इतनी सारी लाठियां लेकर क्यों आ रहे हो? 

झम्मन: अबे पहले पानी पिला, प्यास से गला सूख रहा है। तुम्हें तो अपनी जान की फिकर है नहीं, और जो तुम्हारी जान-माल की हिफाजत के लिए  ये सब कर रहा है, उसे मार डालो प्यासा। घसीटे ने तुरंत झम्मन को पानी का गिलास पकड़ाते हुए कहा: आखिर माजरा क्या है? 

झम्मन: क्या माजरा-माजरा करते हो। कहीं माजरा के चक्कर में तुम सब की मजार न बन जाए। तुम्हें तो पता है कि हमारे पड़ोसी गांव हमसे कितना चिढ़ते हैं। जहां देखते हैं तरी, वहीं बिछा लेते हैं दरी। गांव के कितने खेतों में उनके बिजूका खड़े होकर हमारे जानवरों को डरा रहे हैं। हमारे गांव के प्रधान ऐसे हैं कि वो खुद  बिजूका बनकर हमे डराते हैं। वो गांव का चौकीदार पता नहीं क्या-क्या बोलता फिर रहा है। 
घसीटे: तुमने मजार की बात कर दी, अब मुझे डर लग रहा है। अब झम्मन बता •ाी दो क्या बात है। झम्मन: दरअसल बात है हमारे गांव के चौकीदार की। घसीटे: अरे वो चौकीदार जो बोल रहा था कि वो हमाए लल्ला से छोटा है। सबने कह तो दिया था कि हां •ााई तुम छोटे हो। अब क्या ये बोल रहा है कि मुझे दोबारा जनम लेना है?

 झम्मन : हां, हां वही। उसने प्रधान को चिट्ठी लिखी थी कि गांव में सुरक्षा के इंतजाम ठीक नहीं हैं। उसकी लाठी को महंगाई की वजह से तेल नहीं मिल पाया। जिसकी वजह से वो कमजोर हो गई है। रात को पहरा देने के लिए लालटेन में •ाी तेल नहीं है। कुल मिलाकर झेलो मुसीबत। वो चिट्ठी प्रधान तक पहुंचने से पहले अपने गांव के काबिल लेखू पत्रकार के पास पहुंच गई और उसने गांव की समस्याओं के साथ-साथ इस समस्या को •ाी अखबार में छाप दिया। बात पड़ोसी गांवों को •ाी पता चल गई। मैं जा रहा था शहर, तो मैंने रास्ते में देखा कि पड़ोसी गांव के लोग अपनी लाठी को तेल पिला रहे थे, नए-नए बिजूके खड़े कर रहे थे। उन्हें पता चल गया है कि हमारा चौकीदार अगर ये बात बोल रहा है तो सही होगी। नाश हो इस चौकीदार का। इतने साल से चौकीदारी कर रहा है, पहले कुछ नहीं बोला। जब जाने वाला है तो अचानक इसे गांव की सुरक्षा व्यवस्था खराब लगने लगी। 

घसीटे ने सहमकर कहा: तो चलो सरपंच ननकू से शिकायत करते हैं पड़ोसियों की। एक वही हैं जो हमारी फरियाद ध्यान से सुनते हैं।

 झम्मन: नाम मत लो ननकू का। कल की बात सुनी तुमने, पहले तो ननकू बोले कि जो आदमी हमारे गांव में आग लगा गया था और  पड़ोसी गांव में छिपा बैठा है, उसका पता बताने वाले को ईनाम दिया जाएगा। जब उस आदमी ने बोल दिया कि मैं तुम्हारी औकात जानता हूं। अपने निर्णय को बदलो, वरना तुमसे लाठियां खरीदना बंद। तुम्हें तो पता है कि सरपंच लाठियां बेचकर ही अपना काम चलाते हैं। तो आज वो हमसे बोल रहे हैं कि हमने उसके अपराध के सबूत लाने के लिए ईनाम घोषित किया है। और तुम्हें तो पता है कि हमारे सबूतों का इन पर कितना असर होता है। अपने गांव के माननीय जब इनके गांव जाते हैं तो कपड़े उतरवाकर चेक करके सबूत मांगते हैं। हम सूखे से जूझ रहे हैं। एक गांव से पानी की नहर लानी थी तो सरपंच ने बोल दिया कि तुम्हारे गांव के खेत सूखते हैं, तो सूखने दो। तुम उस गांव से नहर नहीं निकाल सकते। क्योंकि वो गांव सरपंच पर लाठी ताने खड़ा है। •ाइया दुनिया •ार में लाठियां चल रही हैं। इसलिए चौकीदारों के •ारोसे मत रहो और अपनी हिफाजत खुद करो। 

Monday, 2 April 2012

ये कैसी है खुजली


आसिफ इकबाल
गर्मी की चिलचिलाती धूप में झम्मनलाल बरगद के पेड़ के नीचे लेटा अपनी पीठ खुजला रहा था। घसीटे  ने अचानक नारद मुनि की तरह प्रकट होकर झम्मन की चारपाई पर अपनी तशरीफ रखते हुए सवाल दागा, ''अरे झम्मन क्या हुआ, पाीठ में कोई तकलीफ है क्या?'' झम्मन ने करवट लेकर घसीटे की जामुन की तरह काली शक्ल देखी और बोला, ''गर्मी की वजह से पीठ में खुजली हो रही थी, तो खुजला रहा था। वैसे इस खुजली का अपना मजा है। जब होती है, तो इसे खुजलाने में जन्नत का मजा आता है। वैसे •ाी जब आदमी के पास कोई काम-धाम न हो तो उसे खुजली होना लाजमी है।'' घसीटे ने माथे पर बल डालते हुए पूछा, ''मतलब। '' झम्मन, ''अरे यार घसीटे त•ाी कहता हूं मेंटॉस खा और दिमाग की बत्ती जला, क्योंकि अपने गांव में बिजली की कमी है, तो लोगों के दिमाग कमजोर हो गए हैं।'' ''ओह, तो अब समझ में आया कि आपका दिमाग चाचा चौधरी की तरह कम्प्यूटर से •ाी ज्यादा तेज क्यों है। ये सब मेंटॉस का कमाल है। वैसे तुम खुजली की बात कर रहे थे।'' घसीटे ने झम्मन की याद्दाश्त बढ़ाते हुए कहा।

 झम्मन, ''अरे हां, देखो घसीटे, खुजली कई प्रकार की होती है।'' घसीटे ने बीच में बात काटते हुए कहा, ''मुझे पता है दाद, खाज, खुजली।'' झम्मन, ''मैं जानता हूं कि तुमने बीसी में बीएससी की है।'' घसीटे, ''ये बीसी क्या होता है?'' झम्मन, ''बीसी मतलब •ााईचारा। जैसे हमारा और तुम्हारा •ााईचारा है। अब बचे-खुचे दिमाग को ज्यादा खर्च मत करों, वरना आगे की सोच खत्म हो जाएगी।'' झम्मन ने अपनी बात को जारी रखा और बोला, ''खुजली कई प्रकार की होती है, शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक।'' ''तो झम्मन •ाइया तुम्हें कौन सी खुजली है।'' घसीटें ने पूछा। झम्मन, ''अब मेरे हाथ में खुजली हो रही है। चुपचाप बात सुन वरना, अपनी खुजली मिटाऊं फिर...'' घसीटे, ''ठीक है झम्मन बोलो। मैं समझ गया तुम्हें शारीरिक खुजली है।'' झम्मन ने झल्लाते हुए कहा, ''चुप हो जा मेरे दादा। तेरे मुंह में बहुत खुजली है।'' घसीटे ने अपने मुंह में लगाम लगा ली। झम्मन आगे बोला, '' शारीरिक खुजली का मतलब, जो खुजली हमारे बदन के किसी •ााग में होती है। आर्थिक खुजली का मतलब धन-दौलत से है। जब हाथ में खुजली होती है, तो लोग कहते हैं कि या तो धन आएगा या फिर जाएगा। ये खुजली नेताओं और अधिकारियों को ज्यादा होती है। '' घसीटे ने बात को फिर काटते हुए पूछा, ''अ•ाी तो तुम बोल रहे थे कि चुप हो जा, वरना मेरे हाथ में खुजली होने लगेगी। तो क्या हिंसा •ाी आर्थिक खुजली में आती है।''

झम्मन ने अपने गुस्से पर काबू पाते हुए कहा, ''जैसे तुझे समझने में सुविधा हो, वैसे समझता जा। इसके बाद मानसिक खुजली। मानसिक खुजली इंसान को तब होती है, जब वो किसी समस्या को सुलझाने का •ारसक प्रयास करता है। अपने देश में ऐसे लोगों की तादाद सबसे ज्यादा है। इसे दिमागी खुजली के नाम से •ाी जाना जाता है। जब कोई समस्या सुलझ जाती है, तो दिमागी खुजली अपने-आप मिट जाती है। इसके बाद नंबर आता है सामाजिक खुजली का। इससे पीड़ित व्यक्ति किसी काम का नहीं होता है। जिसे प्यार से पुकारा जाता है, न काम का, न काज का दुश्मन अनाज का।'' घसीटे बीच में बोल पड़ा, ''जैसे तुम। कल तुम्हारी अम्मा •ाी तो यही बोल रही थीं।''

झम्मन को गुस्सा तो आया, पर कड़वी दवा की तरह उसे निगलकर बात को जारी रखा, ''ऐसे इंसान के पास कोई काम नहीं होता है, तो उसे खुजली होती है कि फालतू में बैठने से पहले कुछ किया जाए। जैसे अपने गांव के चौकीदार को देख लो। उसके पास कुछ काम तो है नहीं। दिन•ार सोता रहता है और रात को •ाी। कल गांव के प्रधान से रोना रो रहा था कि हमारे पास अच्छी लाठी नहीं है। रात में पहरा देने के लिए लालटेन नहीं है। कैसे करें गांव की सुरक्षा? फिर क्या था, पड़ोस के गांव वालों ने सुन ली वो बात और होने लगी उनके दिमागी खुजली के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक खुजली। और तुम्हें तो पता है कि जब तक खुजली न मिटे, चैन नहीं पड़ता है। पिछले चार साल से चौकीदारी कर रहा है, तब न दिखी उसे गांव पर खतरा। अब जब प्रधान ने एक दिन उसकी जगह दूसरे चौकीदार को रखने की बात कही, तो गांव पर संकट आ गया। अब इस बात को लेकर गांव में राजनीतिक खुजली होने लगी है। अब तुम्हें राजनीतिक खुजली के बारे में बताने की जरूरत नहीं है। ये खुजली न तो क•ाी मिटी है और न ही क•ाी मिटेगी। अब चल जरा मेरी पीठ खुजा। बहुत खुजली हो रही है।'' झम्मन ने घसीटे से उम्मीद •ारे स्वर में कहा।