Monday, 4 August 2014

तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं...

कभी खुशी कभी गम सहते है
तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं
मेरी पलकों में अपने आंसू रख दे
खिलते चेहरे गुमसुम नहीं रहते हैं

उड़ते वक्त को कैद कर ले
ख्वाबों को अपने आगोश में भर ले
ये वो पल हैं जो मुख्तसर होते हैं
तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं

मुझे अपनी जिंदगी का सहारा कर ले
मेरे हिस्से की हंसी अपने नाम कर ले
मेरी आंख से अश्क कम बहते हैं
तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं

मौला मेरे एक फरमान सुना दे
उन्हें मेरे दिल में कुछ इस तरह बसा दे
‘अरमान’ किस कदर मुंतजिर रहते हैं
तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं...

Friday, 1 August 2014

मेरे दिल से खुद को निकालों तो जानूं

अपने दिल से मुझे निकाला, तो क्या बात हुई
मेरे दिल से खुद को निकालों तो जानूं
इश्क-ए-जहां में मैं तेरे लिए अजनबी सही
इस जिगर के मकान का मालिक मैं तुझे मानूं

कुछ इस तरह से तूने इस पर कब्जा किया है
हर पल सांसों ने जिंदगी से सौदा किया है
फिर कैसे तुझे अपनी मौत का सौदागर मानूं
मेरे दिल से खुद को निकालों तो जानूं

मेरा बनकर मेरे दिल में रहता है
हर दर-ओ-दीवार से कुछ कहता है
खुलेआम इजहार-ए-मोहब्बत करे तो मानूं
मेरे दिल से खुद को निकालों तो जानूं

कभी अपनी तहजीब को धोखा दे
होके बेपर्दा तमन्नाओं को एक मौका दे
मेरी तरह अपने भी 'अरमान' सजा तो मानूं
मेरे दिल से खुद को निकालों तो जानूं