Tuesday, 7 February 2017

आंखो से बिखरे हुए ख्वाब चुन तो लो..

थमीं धड़कनों की आवाज़ सुन तो लो

अनकहे अल्फाज़ों की बात सुन तो लो
बेचैन जज़्बातों को बयान कैसे करूं
आंखो से बिखरे हुए ख़्वाब चुन तो लो

तेरे संग गुज़ारा वो साथ ख़ूबसूरत है
छुपके जो की, वो मुलाक़ात ख़ूबसूरत है
मोहब्बत की वो अपनी कायनात ख़ूबसूरत है
ख़्यालों में खोए वो ख़्यालात ख़ूबसूरत है

मेरा क्या है, मैं तो चला जाऊंगा
हर मर्तबा मोहब्बत से छला जाऊंगा
तेरे भेजे हुए खत जला जाऊंगा
मिट्टी में वो यादें मिला जाऊंगा

रोना इन आंखों ने अब छोड़ दिया है
नज़रों को उस तरफ से मोड़ दिया है
पत्थर में दिल रखके तोड़ दिया है
टूटे हुए अरमां को फिर जोड़ दिया है

लौट के जो न आए, वो आवाज सुन तो लो
आंखो से बिखरे हुए ख्वाब चुन तो लो......










Saturday, 4 February 2017

बड़े एतराम से मैंने उन्हें आज़ाद किया


बड़े एतराम से मैंने उन्हें आज़ाद किया
दिल में क़ब्र खोद सुपर्द ए ख़ाक किया
वजह नहीं रही रिश्ता अब निभाने की
बस यही सोच मोहब्बत को बर्बाद किया

यकीं है चाहत पे मेरी तुम्हें नाज़ नहीं
दिल ए सुकुं दे, ऐसी कोई आवाज़ नहीं
आज फिर मैंने चांद को बेदाग़ किया
बड़े एतराम से मैंने उन्हें आज़ाद किया

बेइंतहा मोहब्बत थी या फिर मजबूरी
मुकम्मल होके भी थी ये कहानी अधूरी
ग़म लेके खुशियों को तेरी आबाद किया
बड़े एतराम से मैंने उन्हें आज़ाद किया