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Monday, 3 April 2017

मैं धूप हूं, तुम छांव हो

मैं धूप हूं, तुम छांव हो
मैं सुनसान,तुम गांव हो
धुआं-धुआं सा उड़ता इश्क़
मैं सर्द हवा, तुम अलाव हो
तपता हूं रेत की तरह
करीब समंदर है
जलती हैं तमन्नाओं की लहरें
कैसा अजीब मंज़र है
मैं हारी बाज़ी, तुम दांव हो
मैं धूप हूं, तुम छांव हो
मैं सुनसान,तुम गांव हो

फकीर से हो गए हैं अल्फ़ाज़
फ़िज़ाओं में गूंजे बस यही आवाज़
मैं ख़ामोश रात, तुम साज़ हो
मैं धूप हूं, तुम छांव हो
मैं सुनसान,तुम गांव हो

बड़ी अजीब सी ये बात हुई
ज़िंदगी से यूं अचानक मुलाक़ात हुई
फिर न सुबह हुई, फिर न रात हुई
'अरमां' कुछ तो बोलो, क्या बात हुई
मैं सफ़र हूं, तुम पांव हो
मैं धूप हूं, तुम छांव हो
मैं सुनसान,तुम गांव हो...

Thursday, 16 March 2017

पता नहीं कौन सी वो रात होगी 
जब आसमान में चांद होगा 
और हर तरफ चांदनी होगी 
मखमली हाथ छू रहे होंगे अहसासों को 
शरम-ओ-हया भी रुखसती की तैयारी में होगी 
तुम्हारी खूबसूरत सी बातूनी आंखे 
न जाने कितनी बातें कहने को बेताब होंगी 
धड़कते दिलों की सांसों में तपिश होगी 
जो पिघला रहे होंगे हर एक बंदिश  
मोहब्बत के समंदर की बेबाक मौजें 
जिसमें डूबने की हर पल चाहत होगी 
सोचता हूं, बाहों में सारे 'अरमान' भरके 
पूरा तेरा हर ख़्वाब कर दूं 
आसमां से सितारे चुनके तेरी मांग भर दूं...

पता नहीं कौन सी वो रात होगी

पता नहीं कौन सी वो रात होगी 
जब आसमान में चांद होगा 
और हर तरफ चांदनी होगी 
मखमली हाथ छू रहे होंगे अहसासों को 
शरम-ओ-हया भी रुखसती की तैयारी में होगी 
तुम्हारी खूबसूरत सी बातूनी आंखे 
न जाने कितनी बातें कहने को बेताब होंगी 
धड़कते दिलों की सांसों में तपिश होगी 
जो पिघला रहे होंगे हर एक बंदिश  
मोहब्बत के समंदर की बेबाक मौजें 
जिसमें डूबने की हर पल चाहत होगी 
सोचता हूं, बाहों में सारे 'अरमान' भरके 
पूरा तेरा हर ख़्वाब कर दूं 
आसमां से सितारे चुनके तेरी मांग भर दूं...

Tuesday, 14 March 2017

इबादत हो गई पूरी कज़ा आज भी बाक़ी है

झुकी झुकी सी निगाहों का मज़ा आज भी बाक़ी है
जो नज़र से कर गए क़त्ल सज़ा आज भी बाक़ी है
फ़ना होने को तो अब कुछ और न बचा
इबादत हो गई पूरी कज़ा आज भी बाक़ी है

ख़्याल से भी आपका ख़्याल नहीं जाता
 इक यही जिंदगी का सवाल नहीं जाता
न जाने क्यों लगता है रज़ा आज भी बाक़ी है
इबादत हो गई पूरी कज़ा आज भी बाक़ी है

मेरे सीने में रेंगती हैं तेरी सांसें
खुद को ढूंढके अब लाऊं कहां से
'अरमान' लुट गए जज़ा आज भी बाक़ी है
इबादत हो गई पूरी कज़ा आज भी बाक़ी है

Tuesday, 7 February 2017

आंखो से बिखरे हुए ख्वाब चुन तो लो..

थमीं धड़कनों की आवाज़ सुन तो लो

अनकहे अल्फाज़ों की बात सुन तो लो
बेचैन जज़्बातों को बयान कैसे करूं
आंखो से बिखरे हुए ख़्वाब चुन तो लो

तेरे संग गुज़ारा वो साथ ख़ूबसूरत है
छुपके जो की, वो मुलाक़ात ख़ूबसूरत है
मोहब्बत की वो अपनी कायनात ख़ूबसूरत है
ख़्यालों में खोए वो ख़्यालात ख़ूबसूरत है

मेरा क्या है, मैं तो चला जाऊंगा
हर मर्तबा मोहब्बत से छला जाऊंगा
तेरे भेजे हुए खत जला जाऊंगा
मिट्टी में वो यादें मिला जाऊंगा

रोना इन आंखों ने अब छोड़ दिया है
नज़रों को उस तरफ से मोड़ दिया है
पत्थर में दिल रखके तोड़ दिया है
टूटे हुए अरमां को फिर जोड़ दिया है

लौट के जो न आए, वो आवाज सुन तो लो
आंखो से बिखरे हुए ख्वाब चुन तो लो......










Saturday, 4 February 2017

बड़े एतराम से मैंने उन्हें आज़ाद किया


बड़े एतराम से मैंने उन्हें आज़ाद किया
दिल में क़ब्र खोद सुपर्द ए ख़ाक किया
वजह नहीं रही रिश्ता अब निभाने की
बस यही सोच मोहब्बत को बर्बाद किया

यकीं है चाहत पे मेरी तुम्हें नाज़ नहीं
दिल ए सुकुं दे, ऐसी कोई आवाज़ नहीं
आज फिर मैंने चांद को बेदाग़ किया
बड़े एतराम से मैंने उन्हें आज़ाद किया

बेइंतहा मोहब्बत थी या फिर मजबूरी
मुकम्मल होके भी थी ये कहानी अधूरी
ग़म लेके खुशियों को तेरी आबाद किया
बड़े एतराम से मैंने उन्हें आज़ाद किया

Saturday, 17 December 2016

किसको कहें अपना, कौन है सहारा...

किसको कहें अपना, कौन है सहारा,
ख़ुदग़र्ज़ी में डूबा है ये जहान सारा,

दिल को लग जाए अच्छी वो बात नहीं होती,
मेरे ग़म की तेरे चश्म से बरसात नहीं होती,


इस हाल को न समझे, इस हाल को न जाने,
तन्हा ही जी रहे हैं ग़ुजरे हुए ज़माने,

लफ़्ज़ों की है ज़बानी, लफ़्ज़ों से है सुनानी,
कुछ दिन की बात है ये फिर ख़त्म है कहानी,

मेरी बेइंतहा मोहब्बत मेरी ख़ूबियों पे भारी,
मेरे अख़लाक़ की तस्वीर क्या ख़ूब है उतारी,

क्यों इस क़दर ग़मों से भर जाता हूं,
तुम्हें कोई और देखे तो डर जाता हूं,

काश तुमने भी ज़रा मोहब्बत दिखाई होती,
कभी प्यार से ये बात समझाई होती,

मेरे दिमाग़ के फ़ितूर नहीं मर सकते,
वो कहते है के अरमान नहीं सुधर सकते,

तुम्हारी सोच से ज़्यादा बद्तर नहीं हूं,
तुम बदल गए हो मैं आज भी वहीं हूं....