Monday, 11 February 2013

कुंभ हादसा



चंद घंटों पहले माहौल में श्रद्धा का उद्घोष था
हुक्मरानों की कमी से अब कोई हलाक तो कोई बेहोश था

नन्हा बच्चा अपनी मृत मां को जगा रहा था
एक सभ्य पेशेवर तबका इससे अपनी रेटिंग बढ़ा रहा था

पुलिस हादसे की कड़ी से कड़ी खोज रही थी
बद्इंतजामी से मासूम जिंदगिंया दम तोड़ रही थीं

सुरक्षा के नाम पर हथियार डाल रहे थे
पीड़ितों को मुआवजा देकर बात टाल रहे थे

हम तो मुफलिसी में भी कुंभ नहाकर दुनिया छोड़ जाएंगे
अपने पाप धोने को हुक्मरान कब गंगा में डुबकी लगाएंगे।।।
- अरमान आसिफ इकबाल

5 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 13/02/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. बहुत ही उम्दा


    सादर

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    1. आपका तहे दिल से शुक्रिया...

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  3. आप सभी लोगो का तहे दिल से शुक्रिया...

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