Tuesday, 9 June 2015

बुरे होने का सबूत मिल गया

बुरे होने का सबूत मिल गया
मैं अपनी पहचान पाकर हिल गया
वक्त भी गवाही दे रहा है
साथ रहते मालूम ही नहीं पड़ा
कितने गुनाह कर रहा था
जिसका हिसाब किताब 
लगातार तुम जोड़ रहे थे
एक कारोबारी बनिये की तरह
पाई-पाई की तोहमत को जोड़ रखा था
जैसे मालूम हो कि एक दिन यही काम आएंगे
मेरे किरदार को दागदार बनाने के लिए
क्या एक भी मुझमें अच्छाई नहीं मिली
या फिर छलनी से छान लिए मेरे हर इक ऐब
कच्चा हूं थोड़ा जज्बातों के हिसाब किताब में
थोड़ा सा दिल क्या दुखा, लगा चीखने चिल्लाने
शैतान को खड़ा कर देता हूं बाहर लाके
काश तुम भी वक्त के साथ अपने शैतान को बाहर कर देते
जो सालों से बैठा रहा तुम्हारे अंदर
मेरे हर मर चुके शैतान को ज़िंदा करने के लिए....

4 comments:

  1. बहुत प्यार सा आता है इन लाइंस पर:
    कच्चा हूं थोड़ा जज्बातों के हिसाब किताब में
    थोड़ा सा दिल क्या दुखा, लगा चीखने चिल्लाने
    और दिल चहता है, कुछ नही तो एक
    दुखे हुए दिल को, फु फु कर के फूंक दिया जाये...
    गम तो कौन किसी के हल्के कर सका है, थोडी सी ठंडक तो मिलेगी ही....
    एक “ फू, फू फू भरी ठण्डी फूंक आपकी
    जली बुझी नज़्मों के नाम

    ReplyDelete