Monday, 4 August 2014

तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं...

कभी खुशी कभी गम सहते है
तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं
मेरी पलकों में अपने आंसू रख दे
खिलते चेहरे गुमसुम नहीं रहते हैं

उड़ते वक्त को कैद कर ले
ख्वाबों को अपने आगोश में भर ले
ये वो पल हैं जो मुख्तसर होते हैं
तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं

मुझे अपनी जिंदगी का सहारा कर ले
मेरे हिस्से की हंसी अपने नाम कर ले
मेरी आंख से अश्क कम बहते हैं
तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं

मौला मेरे एक फरमान सुना दे
उन्हें मेरे दिल में कुछ इस तरह बसा दे
‘अरमान’ किस कदर मुंतजिर रहते हैं
तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं...

17 comments:

  1. लाजवाब रचना।।।

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    1. सादर आभार अनुषा,,,

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    1. धन्यवाद सक्सेना जी,,,

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  3. वाह। बेहतरीन नज़्म आसिफ जी

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    1. सादर आभार स्मिता,,,

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  4. नाज़ुक एहसासों को पिरोती खूबसूरत प्रस्तुति !

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  5. साधना जी सादर धन्यवाद,,

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    1. सादर आभार प्रसाद जी,,,

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  7. ब्लॉग बुलेटिन की मंगलवार ०५ अगस्त २०१४ की बुलेटिन -- भारतीयता से विलग होकर विकास नहीं– ब्लॉग बुलेटिन -- में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ...
    एक निवेदन--- यदि आप फेसबुक पर हैं तो कृपया ब्लॉग बुलेटिन ग्रुप से जुड़कर अपनी पोस्ट की जानकारी सबके साथ साझा करें.
    सादर आभार!

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  9. मेरी आंख से अश्क कम बहते हैं
    तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं
    खूबसूरत अशआर ,

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  10. उम्दा रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ

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  11. मेरी आंख से अश्क कम बहते हैं
    तेरे नैना बहुत कुछ कहते हैं
    खूबसूरत

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