Tuesday, 3 March 2015

अब और क्या इन दुआओं में चाहता हूं



अब और क्या इन दुआओं में चाहता हूं
तेरी जिंदगी को खूबसूरत बनाना चाहता हूं
इतनी तासीर इन हाथों में देदे ऐ मेरे खुदा
तोड़कर कदमों में सितारे बिछाना चाहता हूं

रौशन रखना चाहता हूं उम्मीदों का चराग
गम चुराना चाहता हूं
उन आंखों के आंसू
इन आंखों से गिराना चाहता हूं

हर मुसीबत मिटाना चाहता हूं
खुशियां दिखाना चाहता हूं
जो बहार लेकर आए
वो वादा निभाना चाहता हूं

हर कदम साथ निभाना चाहता हूं
रुठे तो मनाना चाहता हूं
तेरा हमसफर बनकर अरमान
जिंदगी बिताना चाहता हूं










9 comments:

  1. इतनी तासीर इन हाथों में देदे ऐ मेरे खुदा
    तोड़कर कदमों में सितारे बिछाना चाहता हूं
    बेहतरीन

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  2. आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाएँ !

    कल 06 /मार्च/2015 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  3. इतनी तासीर इन हाथों में देदे ऐ मेरे खुदा
    तोड़कर कदमों में सितारे बिछाना चाहता हूं

    अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको .

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  4. शानदार अहसासों से सजी हुई रचना।

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