Wednesday, 2 January 2013

वो कहता गया मैं सुनता गया

वो कहता गया मैं  सुनता  गया
उसने  क्या  कहा , मैंने  क्या  सुना ,
कुछ  सुना  सुना  सा  लगता  है ,
वो  कहता  है  और  हँसता  है ,
शायद  कोई  साथी  नहीं  उसका ,
तनहा  तनहा  सा  लगता  है ,
जो  हम  सुन  नही  सकते ,
जाने  क्या  क्या  बकता  है
सब  पर  नज़र  है  उसकी ,
सबकी  खबर  वो  रखता  है
दूर  दूर  वो  रहता  है ,
पर  साथ  साथ  वो  चलता  है
आँखों  से  रहता  है  ओझल ,
हर  पल  रंग  बदलता  है .
जिसका  वो  साथी  बन  जाये
दुश्मन  देख  देख  फिर  जलता  है
यादों  को  रखता  है  जेबों  में
उम्मीदों  को  हाथ  में  रखता  है
थोडा  शर्माता  है  शायद,
इसलिए  पर्दा  करता  है,
इसको कोई  देख  न  पाया
'वक़्त-बेवक्त' निकलता  है...
               ......  आसिफ इकबाल


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