Sunday, 19 February 2012

हम सब कुत्ते हैं



आसिफ इकबाल
अक्सर लोग आवेश में आकर अपने दुश्मनों को बद्दुआ दे देते हैं कि कुत्ते की मौत मरेगा। इसी तरह से कुछ मुहावरे भी कुत्तों के सम्मान को ठेस पहुंचाते हुए आम इंसानों द्वारा बनाए गए हैं। मसलन, कुत्ते की तरह क्यों भौंक रहा है, कुत्ते की नस्ल वगैरह, वगैरह...। भले ही किसी जमाने में कुत्ते को कुत्ते की नजर से देखा जाता हो, पर आज के दौर में कुत्ते ने देश में बढ़ते भ्रष्टाचार की तरह तेजी से तरक्की की है। इंसानों ने कुत्ते की आदतों को काफी हद तक आत्मसात करना शुरू कर दिया है। और हो भी क्यों न। आजकल कुत्ते अच्छा खा रहे हैं, बड़ी-बड़ी महंगी गाड़ियों में घूम रहे हैं। हसीन महिलाओं की गोद में खेलते कुत्ते जवान इंसानों के अरमानों पर पानी फेरते नजर आते हैं। बडेÞ-बड़े अफसरों के पास लोगों से मिलने का टाइम नहीं है, पर कुत्ते में अपने लाडले बच्चे का अक्स देखकर पूरा टाइम देते है। पूरी फैमिली इस कुत्ते के आगे कुत्ता बनी रहती है। धार्मिक ग्रंथों से ज्यादा लोग कुत्ता पालने के साहित्य में रुचि दिखा रहे हैं। लगता है यही कुत्ता इनका उद्धार करने वाला है। दरअसल, कुत्ता पालने के पीछे भी एक राज है। मालिक और कुत्ते की कहानी तो जगजाहिर है। मौजूदा परिवेश में कुत्ते की वफादारी से काफी सबक लिया जा रहा है। बॉस कुत्ता इसलिए पाल रहा है कि वो अपने नीचे के कर्मचारियों के नेचर के बारे में जान सके, उसकी वफादारी को पहचान सके। कर्मचारी इसलिए कुत्ता पाल रहा है कि वो अपने बॉस के प्रति किस तरह से वफादार बने, इसका पता लगा सके।
समय के साथ-साथ कुत्ते को भी अकल आई और उसने अपने नेचर में बदलाव किया। इंसानों पर कई सालों की रिसर्च के बाद उसने पाया कि किस तरह इनके घर में घुसा जा सकता है। कुत्ते ने इंसानों की संस्कृति को आत्मसात किया, अपनी नस्ल के कुत्तों के अलावा अपने मालिक के घर की तरफ आंख उठाने वाले पर भौंकना शुरू कर दिया। आखिर उसे भी तो अपनी वफादारी का सबूत मालिक को पेश करना है। ऐसे कुत्ते की ऊंची शान को देखते हुए, गली के कुत्तों को ईर्ष्या होना स्वाभाविक है। वो भी हर ऊंचे रसूखदार इंसान को देखकर भौंकने के बजाए पूंछ हिलाने लगे। शायद इन गली छाप कुत्तों को ये नहीं पता कि जो कुत्ता इतनी ठाठ-बाट से रह रहा है, वो कोई ऐसा-वैसा कुत्ता नहीं । उसको ऐशो-आराम विरासत में मिला है। उसके पूर्वज भी इस सुख को भोगते रहे हैं। आज भी उनकी नस्लों का ऐशो आराम की जिंदगी पर एकछत्र राज है। तुम ठहरे गली के कुत्ते, अगर अभी भी तुम्हें अकल नहीं आई, तो तुम्हारी नस्लें आगे भी गली के कुत्ते की तरह रहेंगी। अब गली का कुत्ता सोच में पड़ गया कि किस तरह से बदलाव लाया जाए, जो उसकी आने वाली नस्लें सुकून से ऐशो-आराम की जिंदगी जी सकें।




No comments:

Post a Comment