Saturday, 25 February 2012

किस्सा इडियट बॉक्स का


रात को पति की नींद अचानक खुल गई। ऐसा लगा कि कहीं कोई औरत रो रही है। डरते-डरते पति देव ने लाइट जलाई तो देखा कि पत्नी की आंखों से गंगा-जमना कि तरह दो धाराएं बह रही हैं। पति ने पत्नी के कुछ बोलने से पहले सुबह से लेकर शाम तक की अपनी गतिविधियों को स्कैन कर डाला कि कहीं उसने जाने-अंजाने में पत्नी को कुछ बोल तो नहीं दिया। आखिरकार जब पत्नी से रोने की वजह पूछी तो पत्नी की जवाब था कि फला चैनल पर आने वाले फला धारावाहिक की फला औरत का पति कई दिनों से लापता है। क्या वो वापस घर आ पाएगा? इनकों अपने से ज्यादा दूसरों की फिक्र है। भई ये हाल है हमारे देश में टीवी का। टीवी वालों को भी चैन नहीं है कि वो किसी को चैन से सोने दें। घर की शांति व्यवस्था को भंग करने में टीवी ने विश्व कीर्तिमान स्थापित कर रखा है।

 घर मे सुख शान्ति बनाए रखने के लिए एक सिस्टम होता है। पत्नी वित्तमंत्री है, सास रक्षामंत्री है, ससुर विदेशमंत्री और साली लोक सम्पर्क मंत्री होती है। अब सभी का सोचना ये होता है कि पति प्रधानमंत्री होता होगा, लेकिन बेचारा पति प्रधानमंत्री नहीं, जनता होता है। जिसकी घर में एक नहीं चलने वाली होती है। एक तो दिन भर गधे जैसा काम करे और रात में जैसे ही टीवी के सामने थोड़ा मनोरंजन करने के लिए बैठे तो पीछे से आवाज आती है कि सुनिए जरा फला चैनल लगाना, आज उसमें फला का बेटा, फला को लेकर भागने वाला है। लो फिर भैंस गई पानी में। पति महोदय को टीवी पर चल रहे मैच में देखना है कि लोगों को बेसब्री से अपने शतकों के शतक का प्रशाद भगवान सचिन कब देंगे, लेकिन अगर चैनल चेंज नहीं किया तो पता चला कि प्रशाद के चक्कर में घर में खाना ही नहीं मिला। कहने को तो हमारे देश को पुरुष प्रधान कहा जाता है, पर दुनिया में इसकी छवि महिला प्रदान देश की है।

देश को महिला प्रधान बनाने का पूरा श्रेय टीवी यानी इडियट बॉक्स को जाता है। जिसने सभी को इडियट बना रखा है। कौन कहता है कि हमारे देश की महिलाएं अबला हैं। आज टीवी में प्रसारित होने वाले धारावाहिकों में महिलाएं क्या नहीं कर रही हैं। सारे के सारे धारावाहिक महिला प्रधान होते हैं। घर के मर्द आराम फरमाते हैं और महिलाएं उनके दुश्मनों से पंगा लेकर पूरा बिजनेस संभालती हैं। मजाल है कि घर का मर्द उनके सामने कुछ बोल जाए। ये भी एक बहुत बड़ा कारण है मर्दों का सीरियल पसंद न करने का। कुछ महिलाएं तो ऐसी है, जिन्हें देखकर मरहूम अमरीश पुरी की आत्मा भी कांप जाती है। धारावाहिकों में कुछ महिलाएं तो ऐसी हैं, जिनसे पूरा गांव-शहर थर्राता है। दरअसल महिलाओं के टीवी से चिपकने के कई जायज कारण हैं। सास इसलिए टीवी से चिपकी रहती हैं कि बहु को कैसे काबू में किया जाए और बहु इसलिए कि सास को कैसे काबू में किया जाए। एक दूसरे को फंसाने के नए-नए कॉपीराइट आइडिए धारावाहिकों से ही कॉपी किए जाते हैं। पाकिस्तान में भारतीय धारावाहिकों के हिट होने में पता चला है कि वहां के मर्द और औरतें दोनों ही यहां के धारावाहिकों को पसंद करते हैं। क्योंकि वहां के आतंकी इन धारावाहिकों की खलनायिकाओं से खतरनाक आइडियों को आत्मसात कर रहे हैं। कुछ किरदारों को तो उन्होंने अपना आदर्श बना लिया है। धारावाहिकों का सबसे गहरा सदमा घर के मर्द को झेलना पड़ता है।

धारावाहिकों में किराए के कपड़े और ज्वैलरी पहनने वाली महिलाओं को देखकर पत्नी की डिमांड बढ़ जाती है। शादियों में भी महिलाओं में चर्चा का विषय यही होता है कि देखा फला सीरियल में उसने क्या किया, उसका क्या हुआ। धारावाहिक में अगर प्रेमिका अपने प्रेमी के साथ भागती है, तो यही महिलाएं वाह-वाह करती है, लेकिन अगर पड़ोस की कोई लड़की अपने प्रेमी संग फुर्र हो जाए तो उसके चाल चलन पर अंगुलियां उठने लगती हैं। भला है कि घर की महिलाएं ही सीरियल पसंद कर रही हैं, क्या होगा जब मर्द भी टीवी से चिपक जाएंगे?

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