Sunday, 27 July 2014

मैं व्याकुल हुई जाऊं...

सहज सरल तुम्हरी छवि
जिस पर भटकत जाऊं
मोहन तुम बंसी धरो
मैं व्याकुल हुई जाऊं

ब्रज मे घूमत फिरै हो
बैठी मैं यमुना के तीर
सब गोपियन के प्रेमी तुम
समझ न आवै हमरी पीर

हमरे ह्रदय की पीड़ा का
तुमका सुध कब आवे है
कह दूंगी मैया से जाके
कान्हा बड़ा सतावे है

इस कोमल काया पर
तुम कब दृष्टि डालोगे
आस है अपने मन मंदिर में
प्रेम का दीप जला लोगे...


17 comments:

  1. भक्ति एवं अनुराग के रंग में रंगी सुंदर प्रस्तुति ! बहुत खूब !

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    1. सादर आभार साधना जी...

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  2. कृष्ण भक्ति को समर्पित अनुपम कृति।।।

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    1. धन्यवाद अनुषा,,,

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  3. कृष्णा के प्रेम को समर्पित प्यारी रचना।

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    1. सादर आभार स्मिता,,,

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  4. आपकी लिखी रचना बुधवार 30 जुलाई 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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    1. मेरी रचना को नयी पुरानी हलचल में स्थान देने के लिए शुक्रिया यशोदा जी,,,

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  5. आस है अपने मन मंदिर में
    प्रेम का दीप जला लोगे...

    सुंदर भाव भरे हैं आपने इस रचना में
    बार बार पढ़ा, काफी अच्छा लगा ...!!

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    1. धन्यवाद भास्कर जी,,,

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  6. सुन्दर प्रेमाभक्ति !

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    1. प्रतिभा जी सादर आभार,,,

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  7. Replies
    1. सादर आभार प्रतिभा जी,,,

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  8. बहुत सुन्दर कृष्ण प्रेमपगी रचना

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    1. धन्यवाद कविता जी,,,

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